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सिंगरौली में किसान की आय दोहरी कैसे हो

Posted at October 24, 2017 » By : » Categories : Blog » 0 Comment

सिंगरौली में किसान की आय दोहरी कैसे हो ? इसका हल ढूंढने के लिए सबसे पहले आवश्यक है उनकी समस्याओं को चिन्हित करना। 1.मजदूरों की अनुपलब्धता-सर्वविदित है कि सिंगरौली औद्योगिक क्षेत्र है जहाँ औद्योगिक कार्य के लिए मजदूरी और कृषि कार्य के लिए मजदूरी के भुगतान में बहुत बड़ा अंतर है यह सबसे बड़ी वजह किसानों को कृषि कार्य के लिए मजदूरों का न मिलना। 2.परम्परागत कृषि कार्य-समस्या और बाजार के अनुरूप कृषि कार्य न किया जानायहां किसान आज भी परम्परागत फसलों की खेती करते हैं।खरीफ की यहां की मुख्य फसल में धान सबसे ज्यादा फिर मक्का, अरहर, उड़द,तिल हैं जबकि रवि की फसल में गेहूं सबसे ज्यादा और फिर सरसों, चना,मसूर,अलसी हैं। इस प्रकार यदि दोनों मौसम की फसल की बात करें तो गेहूं और धान का ही उत्पादन ज्यादा होता है जिससे उनकी आय कुछ खास हो ऐसा नहीं हो पाता।नगदी फसल के रुप में मामूली तौर पर शहर और कस्बों के आसपास सब्जी की खेती ही है वह भी व्यावसायिक तरीकों से नहीं वल्कि परंपरागत तौर पर ही है। 3.कृषि उपकरणों का कम उपयोग-मजदूरों के आभाव के बावजूद यहाँ किसान कृषि उपकरणों का उपयोग कम कर रहे हैं।इसकी मुख्य वजह किसानों की जमीन एकल भूमिस्वामित्व की बजाय संयुक्त परिवार के स्वामित्व वाली है और शायद इस वजह से उन्हें इसके लिए कृषि उपकरणों का खरीद हीलाहवाली वाला होता है।दूसरी बात आधुनिक और मध्यम तथा छोटे कृषि उपकरणों के ज्ञान का आभाव भी है। 4.वर्तमान स्थानीय बाजार में फूड प्रोसेसिंग ईकाइयों के आभाव के चलते कान्ट्रेक्ट फार्मिंग का आभाव। 5.बाजार का ज्ञान न होने से स्थानीय बाजार में मांग और आपूर्ति के बीच उत्पन्न अंतर का लाभ न ले पाना।वैसे यह तभी संभव होता है जब शीतगृह की उपलब्धता हो तथा उत्पादन बाजार की आवश्यकता अनुरूप हो। 5.सरकारी योजनाओं की अनभिज्ञता तथा लाभ लेने के प्रति किसानों की स्वयं की उदासीनता भी एक वजह है। 6.कृषि लागत बढ़ जाना-सिंचाई के आधुनिक तरीकों जैसे ड्रिप इरीगेशन तथा स्प्रिंकलर सिस्टम आदि का उपयोग न करना और उर्वरता के लिए वर्मी कम्पोस्ट तथा जैविक खाद के उपयोग की कमी है। मैं अपनी विभिन्न यात्राओं के दौरान देश के बहुत राज्यों पंजाब, हरियाणा, राजस्थान, महाराष्ट्र, गुजरात, बंगाल, उत्तरप्रदेश, आन्ध्रप्रदेश, कर्नाटक, केरल यहाँ तक की मध्यप्रदेश के मालवा और महाकौशल क्षेत्र में किसानों द्वारा कई तरह की नगदी फसलों की खेती ,पशुपालन, कुक्कुट पालन आदि वहाँ की जलवायु तथा आधुनिक तौर तरीकों पर करते देखा है।साथ ही उन क्षेत्रों में शीतगृह आदि भी देखा हलांकि किसानों के कर्ज की बातें जहाँ उत्पादन ज्यादा होता है वहीं देखने को मिल रही हैं पर उन क्षेत्रों की माली हालत बाहरी तौर पर बहुत अच्छी दिखी। कहा जाता है- इदमेव हि चातुर्यं ,पाण्डित्यं इदमेव हि। इदमेव हि सुबुद्धित्वं आयादल्पतरो व्ययः।। कहने का अभिप्राय यहां यह है कि हम इसे राजनीति और किसानों की समस्या से हटकर देखें तो हमारे खर्च आय से ज्यादा होना ही कर्ज का कारण बनता है।और बुद्धिमानी इसी बात पर है कि हम खर्चों पर नियंत्रण रख अपनी आय पर जोर दें। यद्यपि कृषि कार्य ही ऐसा है जहाँ हम मात्र तीन महीनों में कई गुना परिणाम पा पाते हैं।भूलें नहीं एक अनाज का एक दाना बीज होता है और एक पौधे में 100 दानें आते हैं।अब आधुनिक तथा विकसित तकनीक और बाजार अनुरूप तथा व्यावसायिक स्तर पर उत्पादन कर किसान अपनी आय को दूगुना तो क्या कई गुना कर सकते हैं। आगे सिंगरौली मे किसानों को कौन कौन सी फसल और किस तरीके से करें अपने अनुभव और अध्ययन के ऊपर आप सबके सामने अगली कड़ी में रखूँगा।आपके भी कुछ सुझाव हों तो मुझे मेरे Whatsapp Number 9165047547 पर भेजें।

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